कितना कुछ है, कहने सुनने के लिए


बिग बैंग, आइस एज, मेसोपोटामिया, बबिलोनियन, रोमन, ग्रीक, अशोका, सिकंदर, प्लूटो, सुक्राति, होमर, अपोलो, बुध, आदम, अब्राहिम, मोजेस, ईशा, मुहम्मद और ग़ालिब (सन १७९७) तक का सफ़र इन्टरनेट के जरिये किया पिछले कुछ सप्ताह | बेहद ज्ञानपूर्ण व रोचक रहा ये सफ़र | इसी दौरान ये तथ्य फिर एक बार उभरा की इन्टरनेट वर्तमान युग मैं सूचना का सबसे महत्वपूर्ण व पावरफुल साधन है|

इसके अलावा पिछले कुछ दिनों कुछ लेख इतिहास के बारे मैं पढे, कुछ डाउनलोड किये बाद मैं पढने के लिए व कुछ इतिहास दर्शाने वाली फिल्में भी देखी जिनमे शामिल हैं, ट्रॉय, ३००, १० कमांडमेंट्स, दा विन्ची कोड |

वाकई कितना कुछ है समझने शीखने के लिए | एक उम्र काफी नहीं ये सब कुछ जानने समझने के लिए | आप जब कुछ जानने का प्रयास करतें हैं तो सुचना का एक सम्पूर्ण भण्डार आपके सामने खुल जाता है और आप हैरान हो जातें हैं की कहाँ से शुरू करूं, वैसे मैं सोभाग्यशाली रहा, रास्ता खुलता गया जैसे-जैसे प्रयास बढते रहे | वैसे तो इतिहास हम सभी ने अपनी पढाई के दौरान पढ़ा होता है पर उससे एक बार फिर से री-विजिट करना मनोरंजक रहता है, और एक नया ही अनुभव प्राप्त होता है, जैसे की ये सब आप पहली बार ही पढ़ रहे है|

इस खोज के दौरान इस तथ्य से रु-ब-रु होना की ओलंपिक खेल ईशा के जन्म से लगभग ७७६ वर्ष पूर्व शुरू चुके थे भी काफी रोमांचकारी रहा, इसके अलावा ये तथ्य भी की “अशोका-द-ग्रेट” उम्र मैं ईशा से लगभग ३३२ बड़े हैं काफी रोचक लगता है|

बरहाल मैं खुश हूँ की समय का इतना बेहतरीन उपयोग हुआ विगत दो सप्ताह, और ये आने वाले समय मैं भी अनवरत जरी रहेगा | ये वादा किया हैं मैंने अपने आप से |

मुझे पढने और सुनने के लिए धन्यवाद|

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